Jharkhand politics: झारखंड की राजनीति में आज एक बेहद भावुक और दुखद दिन है। झारखंड आंदोलन के जननायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संरक्षक शिबू सोरेन के निधन की खबर ने पूरे राज्य को गमगीन कर दिया है। झारखंड के लोग उन्हें सिर्फ एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार, एक आंदोलन और एक जनसंघर्ष के प्रतीक के रूप में देखते रहे हैं। उनकी जीवन यात्रा संघर्ष, त्याग और सेवा की मिसाल रही है।
आज शाम रांची पहुंचेगा पार्थिव शरीर

JMM ने जानकारी दी है कि शिबू सोरेन जी का पार्थिव शरीर आज शाम रांची लाया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए एक विशेष व्यवस्था की जा रही है, ताकि आमजन, पार्टी कार्यकर्ता और झारखंड के लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। रांची की धरती, जिसने कभी उनके नेतृत्व में आंदोलन की चिंगारी देखी थी, आज उनके अंतिम दर्शन के लिए तैयार हो रही है।
पूरे झारखंड में शोक की लहर
शिबू सोरेन जी के निधन की खबर सुनते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। उनके राजनीतिक जीवन की गहराई, आदिवासी समाज के लिए किए गए संघर्ष, और झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई में निभाई गई भूमिका को आज हर कोई याद कर रहा है। झारखंड के हर कोने से लोग सोशल मीडिया पर भावुक संदेशों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
जननायक की विरासत हमेशा जीवित रहेगी

शिबू सोरेन सिर्फ एक नाम नहीं थे, वह एक आंदोलन का चेहरा थे। उन्होंने जो आंदोलन शुरू किया था, वह आज भी झारखंड के युवाओं और आमजन में ऊर्जा भरता है। उनकी विचारधारा, उनका आत्मबल और उनकी सादगी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार और पार्टी मिलकर उनके अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां कर रही हैं और आने वाले समय में एक स्मृति स्थल भी बनाया जाएगा जिससे नई पीढ़ी उनके योगदान को हमेशा याद रख सके।
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