Lok Sabha: हम सभी जानते हैं कि संसद लोकतंत्र की सबसे बड़ी झांकी होती है, जहां हमारे देश के भविष्य को संवारने वाले कानून बनते हैं। लेकिन 11 अगस्त 2025 को हुई लोकसभा की बैठक ने यह दिखा दिया कि कभी-कभी राजनीतिक मतभेदों के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी दिन लोकसभा ने बिना किसी चर्चा के दो अहम टैक्स बिल पास कर दिए। इस बीच विपक्ष के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
बिना विपक्ष के मौजूदगी के कैसे पास हुए दो टैक्स बिल

जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन बिलों को लोकसभा में पेश किया, तब विपक्ष के कोई सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। दरअसल, विपक्ष के कई नेता बिहार के चुनावी सूची में संशोधन और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ चुनाव आयोग के मुख्यालय के सामने मार्च कर रहे थे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। इस कारण सदन में विपक्ष की पूरी टोली अनुपस्थित थी। इसके बावजूद बिलों को सदन में कोई बहस नहीं हुई और उन्हें वॉइस वोट के माध्यम से पास कर दिया गया।
यह बिल भारत के कर प्रणाली को आधुनिक बनाने और सुधारने के उद्देश्य से पेश किए गए हैं। लेकिन विपक्ष की अनुपस्थिति ने संसद के पारंपरिक बहस के अधिकार को कमजोर कर दिया।
विपक्ष का हंगामा और सदन की कार्यवाही में व्यवधान
जब विपक्ष के सदस्य वापस संसद पहुंचे, तब भी उन्होंने सदन में जोरदार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रखा। अध्यक्ष ओम बिरला ने इस दौरान सदन की कार्यवाही को पुनः शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष की लगातार व्यवधान के कारण वह सफल नहीं हो सके। उन्होंने विपक्ष पर लगातार 14 दिनों तक कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
सांसदों के बीच बढ़ता तनाव और मंत्री रिजिजू का बयान
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इस व्यवधान को गंभीरता से लिया और कहा कि सरकार देश और संसद का समय बर्बाद नहीं होने देगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण बिलों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है। रिजिजू ने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा करना चाहती है, लेकिन विपक्ष के बार-बार के विरोध के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि एक बार मुद्दा उठाएं, लेकिन हर दिन एक ही बात को दोहराना उचित नहीं है। रिजिजू ने इन बिलों में आयकर बिल, राष्ट्रीय खेल शासन बिल, व्यापारी जहाज बिल, राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन बिल और मणिपुर जीएसटी संशोधन बिल को प्राथमिकता बताया।
खेल और राष्ट्रीय सुधार के लिए भी बिल पास
सिर्फ टैक्स बिल ही नहीं, लोकसभा ने इसी दिन राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल और राष्ट्रीय खेल शासन बिल 2025 को भी बिना विपक्ष के मौजूदगी के पास किया। युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि ये बिल भारत के खेल तंत्र को पारदर्शी, मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। खासकर जब भारत आगामी ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, तो ऐसे कानून की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
लोकतंत्र के लिए जरूरी है स्वस्थ बहस

संसद की कार्यवाही में बहस और विरोध दोनों ही लोकतंत्र की पहचान हैं। लेकिन जब विरोध प्रदर्शन इतना अधिक हो कि संसद की प्रक्रिया ठप हो जाए, तो इससे देश के विकास को नुकसान पहुंचता है। हर राजनीतिक दल को चाहिए कि वे अपने मत व्यक्त करने के लिए उचित मंच का उपयोग करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
11 अगस्त 2025 की लोकसभा की घटना यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति कितनी महत्वपूर्ण होती है। बिना चर्चा के बिल पास करना सरकार की तेजी को दर्शाता है, लेकिन विपक्ष की अनुपस्थिति से जनप्रतिनिधित्व कमजोर पड़ता है। देश की प्रगति के लिए जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल मिलकर बेहतर संवाद करें और जनता के हित में फैसले लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें व्यक्त किए गए विचार किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति का समर्थन या विरोध नहीं हैं। आधिकारिक और सटीक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी वेबसाइट या संसदीय रिकॉर्ड देखें।