पुलवामा हमले और अनुच्छेद 370 के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे Satyapal Malik नहीं रहे

Rashmi Kumari -

Published on: August 6, 2025

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Satyapal Malik: कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है जब एक नाम, एक चेहरा, और एक नेतृत्व हमेशा के लिए स्मृतियों में बस जाता है। आज भारत ने एक ऐसे ही नेता को खो दिया है, जो कठिन समय में भी अपने बेबाक विचारों और निर्णयों के लिए जाने जाते थे। हम बात कर रहे हैं सत्यपाल मलिक की, जो पुलवामा आतंकी हमले और अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे ऐतिहासिक दौर में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे। उनके निधन की खबर ने देश को गमगीन कर दिया है, लेकिन उनके कार्यों और फैसलों की गूंज समय की सीमाओं को पार कर आगे भी सुनाई देती रहेगी।

सत्यपाल मलिक: वह शख्स जो इतिहास के सबसे कठिन पलों में जम्मू-कश्मीर की कमान संभाले हुए थे

पुलवामा हमले और अनुच्छेद 370 के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे Satyapal Malik नहीं रहे

सत्यपाल मलिक का नाम उन लोगों में आता है जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनहित के कार्यों का माध्यम माना। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में उस समय की जिम्मेदारी संभाली जब राज्य राजनीतिक और सुरक्षा के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा था। पुलवामा हमले के दौरान उनकी उपस्थिति, और उसके बाद अनुच्छेद 370 को हटाने से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका को देश कभी भुला नहीं पाएगा।

जनता से जुड़े रहने वाला राजनेता

सत्यपाल मलिक की सबसे बड़ी पहचान यह थी कि वह किसी भी मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने से पीछे नहीं हटते थे। चाहे केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना हो या प्रशासन के भीतर की चुनौतियाँ—वह हर विषय पर निडर होकर बोलते थे। उनके मन में देश और आम आदमी के लिए जो संवेदनशीलता थी, वह उन्हें बाकी नेताओं से अलग करती थी। यही कारण था कि वह न सिर्फ सत्ता के गलियारों में, बल्कि आम जनता के दिलों में भी अपनी जगह बना पाए।

अंतिम विदाई एक युग को

उनके निधन से देश ने एक ऐसा राजनेता खो दिया है जिसकी भूमिका को समय कभी नकार नहीं सकता। वह सिर्फ एक पूर्व राज्यपाल नहीं थे, बल्कि ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने निर्णय के कठिन क्षणों में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनकी सोच और उनका दृष्टिकोण आज भी देश के कई युवाओं को प्रेरणा दे सकता है कि राजनीति केवल लाभ की नहीं, ज़िम्मेदारी की चीज़ होती है।

यादें, विचार और इतिहास का हिस्सा

सत्यपाल मलिक के योगदानों को शब्दों में समेटना आसान नहीं, लेकिन यह तय है कि वह एक युग की तरह थे जो अब केवल इतिहास की पुस्तकों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। पुलवामा जैसा दुखद हमला हो या अनुच्छेद 370 जैसी बड़ी ऐतिहासिक पहल—इन सभी में उनकी छवि एक मजबूत प्रशासक के रूप में सामने आई।

डिस्क्लेमर: यह लेख सत्यपाल मलिक के जीवन और योगदान पर आधारित है। इसमें प्रस्तुत जानकारी विभिन्न मीडिया स्रोतों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। लेख का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना है, इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक पक्षधरता नहीं की गई है। लेख पूरी तरह से मौलिक और 100% यूनिक है।

Rashmi Kumari

मेरा नाम Rashmi Kumari है , में एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर हूं और पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही हूं। फिलहाल, मैं The News Bullet पर तकनीकी, स्वास्थ्य, यात्रा, शिक्षा और ऑटोमोबाइल्स जैसे विषयों पर आर्टिकल लिख रही हूं। मेरा उद्देश्य हमेशा जानकारी को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक उसे आसानी से समझ सकें और उसका लाभ उठा सकें।

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