ग्रेटर नोएडा, जनरल लेखक — एक बेटी, एक माँ, एक परिवार टूट गया। 28 वर्षीया Nikki Bhati को कथित तौर पर उसके पति Vipin Bhati और ससुराल वालों ने 21 अगस्त को जिंदा जलाया, केवल इसलिए कि उसने अपने ब्यूटी पार्लर को पुनः खोलने और ख़ुद के सोशल मीडिया रील्स पोस्ट करने की हिम्मत की। यह दर्दनाक दृश्य उसके छह वर्षीय बेटे और बहन Kanchan के सामने घटित हुआ—जिसे देखना हर संवेदनशील दिल को झकझोर देता है।
Nikki Bhati:- हादसे की रात: मासूम बेटे के सामने जलाई गई ज़िंदगी

21 अगस्त की रात निक्की के घर से चीखें गूंजीं। उसकी छोटी बहन कंचन और 6 साल का बेटा उस भयानक दृश्य के गवाह बने जब उसके पति विपिन भाटी ने उस पर थिनर डाला और लाइटर से आग लगा दी।
बच्चे ने मासूम शब्दों में कहा –
“पापा ने मम्मी पर कुछ डाला, थप्पड़ मारा और फिर आग लगा दी।”
सोचिए, छह साल की उम्र में जिसने यह दृश्य देखा हो, उसकी मासूमियत पर कितना गहरा घाव लगा होगा
दहेज की भूख और सालों का शोषण
निक्की की शादी के समय परिवार ने ससुराल वालों को काफी कुछ दिया था—गाड़ी, बाइक, सोना और नकद। लेकिन लालच की कोई सीमा नहीं होती। आरोप है कि उसके ससुराल वाले 36 लाख रुपये और चाहते थे। जब निक्की ने ब्यूटी पार्लर दोबारा खोलने और सोशल मीडिया पर अपने पैशन को आगे बढ़ाने की कोशिश की, तो यही बात ससुराल वालों को नागवार गुज़री।
घटना की संवेदना: बर्बरता के सबूत
Kanchan ने पुलिस को बताया कि झगड़े के बाद Vipin ने thinner डालकर Nikki Bhati को आग लगा दी। Nikki बेहोश करके लाया गया, लेकिन 70 फीसदी दाह जलने के चलते रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
गिरफ्तारी और कार्रवाई
पुलिस ने तेजी दिखाते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- विपिन भाटी (पति) – मुख्य आरोपी, जिसने निक्की को आग लगाई।
- दयाभाटी (सास)
- रोहित भाटी (साला)
- सत्यवीर भाटी (ससुर)
विपिन को हिरासत में लेते समय पुलिस एनकाउंटर जैसी स्थिति बनी और उसके पैर में गोली लगी। बाकी तीनों को भी अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
Nikki Bhati:- पिता का दर्द और बुलडोज़र की मांग

Nikki के पिता, भिखारी सिंह पयला ने कहा,
“मैं अपनी बेटी वापस नहीं ला सकता, लेकिन उनके घर को बुलडोज़ कर देना चाहिए” — उन्होंने सख्त कानूनी कार्रवाई की भी माँग की है।
समाज और व्यवस्था पर सवाल
यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है:
- आखिर क्यों आज भी पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करने वाली महिलाओं को दहेज की जंजीरों में जकड़ा जाता है?
- क्यों बेटियों को आज भी “सामान” समझकर सौदेबाज़ी की जाती है?
- और क्यों हमारी न्याय व्यवस्था इतनी घटनाओं के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा का भरोसा दिलाने में नाकाम नज़र आती है?
Nikki Bhati:- मासूम बेटे का भविष्य
इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा है निक्की का बेटा। वह अब बार-बार कहता है कि “उन्होंने मेरी मम्मी को जला दिया।” इतनी छोटी उम्र में उसने जो आघात झेला है, वह शायद ही कभी मिट पाएगा। समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि इस बच्चे को सुरक्षित और बेहतर भविष्य दिया जाए।
निष्कर्ष: हमें बदलाव की ज़रूरत है
Nikki Bhati की मौत सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ रही—यह समाज, ग़रीबी, बुनियादी मानवाधिकार और विधाने की क्रियान्वितता पर सवाल है। शिकायतें हों या गिरफ्तारी—लेकिन जातीय संवेदना से भरी एक मां की पुकार, चार बरसों का शोषण, एक निर्दोष बच्चे का ज़ख्म—ये सभी धब्बे हमें कानून और समाज की असफलता का एहसास कराते हैं।
Nikki Bhati का जाना एक परिवार का टूटना है, लेकिन अगर इस घटना से समाज जागा, तो शायद उसकी मौत बेकार नहीं जाएगी।
अब न्याय का सिलसिला उजागर हो रहा है—लेकिन Nikki के लिए ये न्याय लाना अब परिवार को खुद गवाही देने और लड़ने की चुनौती छोड़ रहा है।