Indian economy: किसी भी देश की ताकत उसकी अर्थव्यवस्था होती है और भारत इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां पूरी दुनिया उसकी आर्थिक मजबूती को महसूस कर रही है। हाल ही में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने यह भरोसा जताया कि वित्तीय वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.3% से 6.8% की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियाँ मौजूद हैं, लेकिन घरेलू मांग की मजबूती भारत को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा देती रहेगी।
घरेलू मांग बनी सहारा

नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति और घरेलू बाजार की मजबूती अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि वैश्विक उतार-चढ़ाव और व्यापारिक असमानताओं के बावजूद भारत अपनी आर्थिक रफ्तार बनाए हुए है। पहली तिमाही में GDP 7.8% दर्ज की गई है, जो यह साबित करती है कि भारत की विकास यात्रा थमने वाली नहीं है।
अमेरिका के टैरिफ और संभावित जोखिम
हालांकि, इस पूरे सकारात्मक माहौल के बीच कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। अमेरिका की ओर से लगाए गए 50% तक के टैरिफ भारत के निर्यात पर दबाव डाल सकते हैं। नागेश्वरन ने माना कि यह स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि ये रुकावटें लंबे समय तक नहीं रहेंगी। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका दोनों ही 25% दंडात्मक शुल्क हटाने और एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। अगर यह वार्ता सफल होती है, तो भारत के लिए निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
मजबूत भविष्य की ओर कदम

भारत की आर्थिक प्रगति सिर्फ आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी दिख रही है। बढ़ते निवेश, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, और युवा आबादी की क्षमता इसे और मजबूती दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक व्यापारिक तनाव और टैरिफ की बाधाएँ जल्द खत्म हो जाती हैं, तो भारत का विकास अनुमान से भी बेहतर हो सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था इस समय ऐसे मुकाम पर है जहाँ आत्मविश्वास और अवसर दोनों साथ चल रहे हैं। चुनौतियाँ मौजूद हैं, लेकिन उनसे निकलने की क्षमता भारत ने कई बार साबित की है। आने वाले वर्षों में अगर नीतियाँ और व्यापारिक समझौते सही दिशा में आगे बढ़े, तो भारत की आर्थिक कहानी और भी प्रेरणादायक हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है, न कि किसी प्रकार का निवेश या आर्थिक सलाह देना।