कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो खत्म होने के बाद भी दर्शकों के दिमाग में चलती रहती हैं। दृश्यम उन्हीं फिल्मों में से एक है। अब जब drishyam 3 की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है, तो दर्शकों के बीच फिर वही बेचैनी, वही उत्सुकता और वही सवाल लौट आए हैं— इस बार विजय सालगांवकर क्या करेगा?
पिछले दो हिस्सों में दर्शकों ने देखा कि एक आम-सा दिखने वाला इंसान अपने परिवार के लिए किस हद तक जा सकता है। बिना शोर मचाए, बिना हिंसा के, सिर्फ दिमाग और धैर्य के दम पर। अब तीसरा भाग उसी कहानी को आगे बढ़ाने नहीं, बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए तैयार है।
कहानी वहीं से शुरू होगी, जहां सवाल बाकी हैं

drishyam 3 को लेकर जो सबसे बड़ी बात सामने आ रही है, वह यह है कि यह फिल्म अधूरी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी। पिछले हिस्सों में कई ऐसे मोड़ थे, जिन पर दर्शकों ने अपनी-अपनी व्याख्याएं बना ली थीं। तीसरा भाग उन सभी सवालों को एक नई दिशा देगा।
यह फिल्म सिर्फ सस्पेंस पर नहीं टिकेगी, बल्कि उन मानसिक दबावों को भी दिखाएगी, जिनसे किरदार गुजरते हैं। विजय का किरदार अब सिर्फ एक पिता या पति नहीं रह गया है—वह एक ऐसा इंसान है, जो हर कदम सोच-समझकर रखता है, क्योंकि एक छोटी-सी चूक सब कुछ बदल सकती है।
अजय देवगन की वापसी, लेकिन बदले हुए भाव के साथ
अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के रूप में नजर आएंगे, लेकिन इस बार उनका किरदार पहले से ज्यादा गंभीर और भीतर से टूटा हुआ दिख सकता है। लगातार डर, शक और बीते फैसलों का बोझ इंसान को बदल देता है—और यही बदलाव इस बार पर्दे पर साफ दिखने की उम्मीद है।
तबू का किरदार भी कहानी में अहम भूमिका निभाएगा। दोनों के बीच का टकराव सिर्फ कानून और अपराध का नहीं होगा, बल्कि सोच और नैतिकता का होगा। यही टकराव drishyam 3 को साधारण थ्रिलर से अलग बनाता है।
रिलीज़ डेट भी एक संकेत देती है
फिल्म को 2 अक्टूबर को रिलीज़ करने का फैसला सिर्फ तारीख नहीं है। इस फ्रैंचाइज़ी में तारीखों का हमेशा प्रतीकात्मक महत्व रहा है। यह दिन शांति और सच्चाई से जुड़ा माना जाता है, लेकिन फिल्म की दुनिया में यही दिन सबसे ज्यादा तनाव और रहस्य से भरा नजर आता है।
इससे यह साफ होता है कि drishyam 3 सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने नहीं, बल्कि दर्शकों को फिर से सोचने पर मजबूर करने आ रही है।
सस्पेंस के साथ भावनाओं की गहराई
इस बार फिल्म में सिर्फ यह नहीं दिखाया जाएगा कि “क्या हुआ”, बल्कि यह भी दिखेगा कि “उसका असर क्या पड़ा”। परिवार के हर सदस्य पर बीते सालों का बोझ अलग-अलग तरीके से पड़ा है। रिश्तों में खामोशी है, आंखों में सवाल हैं और दिल में डर।
यही भावनात्मक परतें drishyam 3 को और ज्यादा असरदार बनाती हैं। यह फिल्म तेज़ डायलॉग या चौंकाने वाले सीन पर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ते तनाव पर टिकी होगी।
दर्शकों की उम्मीदें क्यों इतनी ऊंची हैं
इस फ्रैंचाइज़ी ने कभी शोर मचाकर खुद को साबित नहीं किया। इसकी ताकत हमेशा इसकी कहानी रही है। यही वजह है कि drishyam 3 से दर्शक कोई तमाशा नहीं, बल्कि एक मजबूत, सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव चाहते हैं।
लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या सच वाकई हमेशा जीतता है, या फिर समझदारी और योजना कभी-कभी सच से भी आगे निकल जाती है।
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निष्कर्ष
drishyam 3 सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन फैसलों की कहानी है, जो इंसान मजबूरी में लेता है और फिर जिंदगी भर ढोता है। यह फिल्म जवाब देने से ज्यादा सवाल खड़े करेगी—और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खूबी होगी।
जब यह फिल्म रिलीज़ होगी, तो दर्शक सिर्फ स्क्रीन नहीं देख रहे होंगे, बल्कि खुद से भी सवाल पूछ रहे होंगे—
अगर मैं उस जगह होता, तो क्या करता?




