Angel One: आज शेयर बाज़ार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है जिसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। देश की मार्केट रेगुलेटर SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि को बढ़ाने का सुझाव दिया है। इस घोषणा के बाद BSE और Angel One जैसे बड़े ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
क्यों टूटा शेयर बाज़ार का भरोसा

SEBI के चेयरमैन तुषार कांता पांडे ने यह साफ किया कि मौजूदा डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बहुत कम है और इसकी वजह से रिटेल इन्वेस्टर्स (छोटे निवेशक) बड़ी मात्रा में जोखिम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ा दी जाए तो निवेशक जल्दबाज़ी में लिए गए फैसलों से बच पाएंगे और मार्केट में स्थिरता आएगी।
यह फैसला पहली नज़र में निवेशकों के हित में दिखता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसका असर उन ब्रोकिंग कंपनियों और एक्सचेंज पर पड़ा है जो डेरिवेटिव्स के ज़रिए ट्रेडिंग वॉल्यूम से मुनाफा कमाते हैं। यही वजह है कि BSE और Angel One दोनों के शेयरों में 6 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
रिटेल निवेशकों को क्यों लग रहा था झटका
पिछले कुछ समय से यह देखा गया है कि देश में इंट्राडे डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग बहुत तेज़ी से बढ़ी है। बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक इसमें शामिल हो रहे हैं, लेकिन अनुभव और जानकारी की कमी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। SEBI की रिपोर्ट में भी यह बताया गया है कि पिछले साल लाखों निवेशकों को डेरिवेटिव्स में पैसा गंवाना पड़ा।
इसी पृष्ठभूमि में SEBI ने कदम उठाते हुए कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने और इंट्राडे इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर और पाबंदी लगाने के संकेत दिए हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि निवेशकों की ट्रेडिंग की गति धीमी होगी और बिना सोचे-समझे किए जाने वाले जोखिम कम होंगे।
कंपनियों पर क्या होगा असर
BSE और Angel One जैसी कंपनियां डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से काफी कमाई करती हैं। जब निवेशक तेजी से खरीद-बिक्री करते हैं तो इन कंपनियों के लिए राजस्व बढ़ता है। लेकिन अगर कॉन्ट्रैक्ट लंबी अवधि के लिए हो जाएंगे और इंट्राडे पर रोक जैसी स्थिति बनेगी, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम घट सकता है।
यही कारण है कि निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी और एक ही दिन में इनके शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
लंबी अवधि में क्या फायदा होगा

भले ही यह फैसला शॉर्ट टर्म में शेयर बाज़ार और ब्रोकिंग कंपनियों के लिए नकारात्मक दिख रहा हो, लेकिन लंबी अवधि में यह कदम मार्केट को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाएगा। जब निवेशक सोच-समझकर निवेश करेंगे तो न केवल उनका पैसा सुरक्षित रहेगा बल्कि मार्केट में स्थिरता भी आएगी।
निवेशकों को भी समझना चाहिए कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग बहुत जोखिम भरा होता है और इसमें त्वरित लाभ की चाहत अक्सर नुकसान में बदल जाती है। SEBI का यह कदम असल मायनों में रिटेल निवेशकों की रक्षा के लिए है।
BSE और Angel One के शेयरों में आई गिरावट फिलहाल निवेशकों के लिए चिंता का कारण है, लेकिन बड़ी तस्वीर यह है कि SEBI मार्केट को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। निवेशकों को इसे अल्पकालिक नुकसान की बजाय दीर्घकालिक सुधार के रूप में देखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी देना है। यहां दी गई जानकारी निवेश की सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाज़ार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय ज़रूर लें।