असम में रेल हादसे में 8 Elephant मरे; Sairang–New Delhi Rajdhani Express से हुई टक्कर ने जंगल की शांति भंग की

Meenakshi Arya -

Published on: December 20, 2025

होजाई (असम) — एक दर्दनाक घटना में असम के होजाई ज़िले में elephant के झुंड को ट्रेन ने टक्कर मार दी, जिसमें कम से कम आठ हाथियों की जान चली गई। यह घटना Sairang से New Delhi के लिए चली Rajdhani Express ट्रेन के पास हुई, जिसने स्थानीय वन्यजीव विभाग और ग्रामीण समुदाय के लिए गहरी बेचैनी पैदा कर दी है।

घटना के समय ट्रेन तेज़ रफ्तार से गुजर रही थी और दुर्भाग्यवश हाथियों का झुंड रेल पटरी पार कर रहा था। रेल की पटरी पार करते हुए अचानक सामने आने वाले इन विशाल जीवों को रोक पाना चालक के बस की बात नहीं रही—जिसके कारण इस भयावह टक्कर की स्थिति उत्पन्न हो गई।

अचानक हुई टक्कर: क्या हुआ सही में?

Elephant: प्राप्त जानकारी के मुताबिक, घटना सुबह के समय हुई जब हाथियों का एक समूह जंगल से निकलकर राशन की तलाश में रेल लाइन की ओर बढ़ रहा था।
इलाके में अक्सर इन जानवरों को घूमते देखा जाता रहा है क्योंकि यह जंगल और बस्तियों के बीच की सीमा है। यह इलाका कभी-कभी वन्यजीवों और मानवीय ढाँचे के संयोगी क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है।

जैसे ही Elephant रेल पटरी पार करने लगे, उसी समय Sairang से चलकर New Delhi की ओर जा रही Rajdhani Express वहां से गुज़र रही थी। टीम के अनुसार, ट्रेन ब्रेक लगाने की कोशिश तो की गयी, मगर हाथियों की संख्या और उनकी धीमी गति ने पलट कर इसे रोक न दिया।
नतीज़तन, छह बड़े व दो छोटे Elephant गंभीर रूप से टकरा गये और उनके मरने की पुष्टि बाद में वन विभाग टीम ने की।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

Elephant: घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय असम वन विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं। अधिकारीयों ने कहा कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और हृदय विदारक हादसा है। उन्होंने बताया कि मृत हाथियों की पहचान और उनकी उम्र का आंकलन किया जा रहा है ताकि आगे का वनीकरण और मनोवैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके।

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“हाथी प्राकृतिक रूप से संवेदनशील और सामाजिक प्राणी हैं। उनकी मृत्यु केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह जैविक और भावनात्मक रूप से एक बड़ा नुकसान है। हम गहराई से इस घटना की जाँच कर रहे हैं तथा ऐसे उपाय सोच रहे हैं जिससे आने वाले समय में पुनः ऐसी कोई दुर्घटना न हो।”

उन्होंने यह भी कहा कि रेल लाइनों के किनारे warning systems और advanced signaling लगाने पर विचार चल रहा है, जिससे आने वाली आगन्तुक और स्थानीय वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।

स्थानीय समुदाय की चिंता और प्रतिक्रिया

होजाई के ग्रामीणों ने भी इस घटना पर गहरी निराशा व चिंता जताई है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उनके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से हाथियों के घूमने की खबरें बढ़ी हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा,
“यहाँ जंगल और बस्तियाँ बहुत नज़दीक हैं। Elephant आएँगे ही… पर हमें लगता है कि रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से यह हादसा टाला जा सकता था।”

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अक्सर रातबिरात हाथी बस्तियों के पास वाले बाज़ारों और खेतों में अपनी पैठ बना लेते हैं, जिससे कभी-कभी दोनों के बीच तनाव भी बढ़ता है।

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निष्कर्ष: एक दुखद घटना जो सोचने पर मजबूर करती है

आज होजाई के ज़िले में elephant की मृत्यु ने केवल वन्यजीव विभाग को चिंतित नहीं किया — बल्कि पूरे समुदाय, पर्यावरण प्रेमियों और समाज के वो हिस्से जिन्हें प्रकृति और मानव की साझी दुनिया की कद्र है, उन्हें भी गहरा झकझोर दिया है।

जंगल इंसानों की दुनिया से अलग नहीं है—बल्कि इसका एक जटिल और नाज़ुक संबंध हमेशा से रहा है।
यह हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम कैसे प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखें, ताकि इंसानी प्रगति जंगल और उसके निर्धारक जीवों के अस्तित्व पर भारी न पड़े।

Meenakshi Arya

मेरा नाम मीनाक्षी आर्या है। मैं एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर हूं और पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हूं। वर्तमान में मैं The News Bullet के लिए टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, यात्रा, शिक्षा और ऑटोमोबाइल्स जैसे विविध विषयों पर लेख लिख रही हूं।

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