AICTE: बेंगलुरू — शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत स्वायत्तता और गुणवत्ता के मुद्दों पर भारत छात्रों’ और युवाओं की एक प्रमुख संगठन All India Democratic Students’ Organisation (AIDSO) ने जोरदार प्रतिक्रिया जताई है। संगठन ने हाल ही में संसद में पेश हुए Higher Education Commission of India (HECI) Bill की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह विधेयक शिक्षण संस्थानों की आज़ादी और संस्थागत स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है।
AIDSO का कहना है कि इस बिल के लागू होने से न केवल शिक्षाविदों की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा, बल्कि शिक्षा की दिशा भी नियंत्रित संस्थाओं के हाथों में चली जाएगी — जिसमें aicte जैसे नियामक निकाय की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह उठने लगा है।
इस विवाद ने केवल शैक्षणिक जगत में ही नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर भी बहस छेड़ दी है। अब यह मुद्दा शिक्षा नीति, संस्थागत पहचान और भविष्य के युवाओं के लिए अवसरों के संदर्भ में गहन चर्चा का विषय बन गया है।
HECI बिल: क्या है पूरा मुद्दा?

HECI बिल प्रस्तावित रूप से उच्च शिक्षा प्रणाली को एकीकृत करने और उसके संचालन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके तहत:
- विभिन्न नियामक निकायों — जैसे UGC, AICTE, NCTE आदि — के कार्यों को एक केंद्रीय अधिकारी Higher Education Commission के अंतर्गत लाया जाना है
- शिक्षण संस्थानों के मानदंड, फंडिंग, पाठ्यक्रम अनुमोदन तथा गुणवत्ता नियंत्रण को एक ही संरचना में समाहित किया जाना है
आधिकारिक तौर पर यह कहा गया है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और निर्णय प्रक्रियाएँ पारदर्शी होंगी।
लेकिन AIDSO तथा अन्य आलोचक इस बिल को स्वायत्तता के विरुद्ध मान रहे हैं — उनका कहना है कि इससे संस्थानों के पास अपने पाठ्यक्रम, शोध प्राथमिकताओं और प्रशासनिक स्वतंत्रता पर निर्बंध बढ़ जाएंगे।
AIDSO का दृढ़ विरोध
AIDSO ने प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि HECI बिल भारतीय शिक्षा प्रणाली को केंद्रीकृत रूप दे रहा है, जिससे मान्यता प्राप्त नियंत्रक निकायों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। संगठन ने यह जोड़ते हुए कहा:
“शिक्षा की गुणवत्ता का अर्थ केवल नियंत्रण से नहीं है, बल्कि स्वतंत्र विचार, शोध की आज़ादी तथा संस्थान के ढांचे में संतुलन बनाये रखने से है। यदि शिक्षा की नीति और निर्णय प्रक्रिया केवल एक केंद्रीय निकाय के हाथों में चली जाएगी, तो संस्थागत स्वायत्तता समाप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।”
AICTE की भूमिका और HECI के संभावित प्रभाव
AICTE (All India Council for Technical Education) देश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था का एक प्रमुख नियामक निकाय रहा है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पाठ्यक्रम, शिक्षण गुणवत्ता और संस्थागत मानक ऐसे हों जो उद्योग के साथ तालमेल बनाएं। लंबे समय से यह निकाय शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम अनुमोदन, मान्यता प्रदान करने तथा शिक्षण मानकों को निरंतर अपडेट करने का कार्य करता रहा है।
अब HECI बिल के तहत यह संभावना जताई जा रही है कि AICTE जैसे नियामक निकायों की ज़िम्मेदारियाँ नई संरचना के अंतर्गत समाहित हो सकती हैं। इससे:
- वर्तमान AICTE की स्वायत्तता और निर्णयन क्षमता पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं
- तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा योजना के बीच भिन्नता प्रभावित हो सकती है
- संस्थागत निर्णयों में नये स्तर की समीक्षात्मक प्रक्रिया लागू हो सकती है
विश्लेषकों का कहना है कि यदि AICTE की भूमिका सीमित हो जाती है, तो तकनीकी संस्थानों के पास अपना स्वतंत्र पाठ्यक्रम और अनुसंधान प्रारूप तय करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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निष्कर्ष
जहाँ एक तरफ़ HECI बिल का उद्देश्य उच्च शिक्षा को केंद्रीकृत और सुव्यवस्थित करना बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ AIDSO और कई शिक्षाविदों ने इसे संस्थागत स्वायत्तता पर प्रहार बताया है। AICTE जैसे निकायों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि शिक्षा के भविष्य को लेकर नीति और स्वतंत्रता के बीच संतुलन की ज़रूरत अनिवार्य है।




